|
has kar dekho..
मायूसी के झूले मे तुम झूलना नही, हँसी ठहाकों को कभी भूलना नही, गम के बादलों को अपने से दूर हटा दो, चुलबुली किल-किलरियों को अपना लो, कोई सपना गर सपने सा टूट गया तो क्या, सपनो संग खिल-खिलाना छोड़ना नही, कल्पनाओं से मुँह मोड़ना नहीँ, खुद को भूल कर जीना क्या है जीना, मुँह लटका कर निराशा का घूँट क्यूँ है पीना, दिल के शिकवों को तुम हटा दो, गम के पाएमानो को गिरा दो, आँखों की पर्छाई के पीछे कभी छिपना नही, चुप्पी से अपने चेहरे को सींचना नही, तितलियों सा खुशी के फूलों पे मंडराओ भंवरों संग गुनगुनाओ खूब शोर मचाओ, शीशे मे खुद को देख मुस्कुराना छोड़ना नही, कभी खुशी मे चाह चाहना छोड़ना नही, याद रखो जो हर दिन हँसी के शरबत को पीते हैं, वोही असल मे जिंदगी के हर पल को जीते हैं...
तो आओ खुद हँसें औरो को हसायें, लतीफ़े सुनायें फिर हस हस कर लोट पोत हो जायें..
"कृष्ण शर्मा"
|
|