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tum dhire se aana..
बादलों के रथ को दौड़ाती, इंद्र-धनुष के रंगों को उड़ाती, खुश्बू के संग शरमाती, इतराती.. लहराती... ये हवा ! इक प्यारी नाज़ुक सी सूरत अभी तक नींद के आँचल मे सोई है, सपनो की दुनिया मे खोई है, उसकी लहराती घटाओं को होलेसे उड़ाना, तुम धीरे से आना.. उसे प्यार से उठना...
कल कल करता शोर मचाती, साजों को संगीत सिखाती, पानी की हल्की धुन्द बनाती, किस्तियों संग हिचकोले खाती, मछलियों को भी पंख लगाती, पर्वतों के झरनो से आती, इतराती... शरमाती.. ये नदिया ! इक भोली अंजान सी अप्सरा अभी भंवरों को छेड़ रही है, तितलियों संग खेल रही है, उसके मासूम चेहरे पे लहरों के छींटे हौले से छिड़काना, तुम धीरे से आना, उसको प्यार से उठना..
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