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Ye Lehren..
कोई ना समझे क्या कहतीं हैं ये लहरें, आवाजों के दरमियाँ भी कुछ छुपाती हैं ये लहरें, दूर शितिज के झरोंखों से आतीं लहराती, जलते बुझते दीयों की सरगम सुनाती हैं ये लहरें, अरमानो मे धधकते दो सूरज जब पिघल जाते हैं, अपने ही सायों मे तस्वीरें बनातीं हैं ये लहरें, खट्टे कुछ मीठे कुछ कड़वे पानियों के, एहसासों से खुद को नमकीन बनाती है ये लहरें, इनका वज़ूद सिर्फ किनारों तक ही नही है, दिल के हर तार को छू जातीं हैं ये लहरें, पहचानतीं हैं ये जवार भाटों की हिचकियों को, हर एहसास को अपने ताप से महसूस कराती हैं ये लहरें, आँखों के समंदर की गहरआईओं मे रहतीं, लम्हों के पाएमानो से छलक जातीं हैं ये लहरें, उछलते उमड़ते अश्कों की ये लहरें...
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