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हो ग्या सवेरा..
सात रंगों का जामा ओढ़े, सूरज चाचा सरपट दोरे, दूर् हुआ काला अंधियारा, सब चमके हो ग्या उजियारा, गूंज उठीं पंछियों की बोली, मिश्री सी सरगम हवा मे घोली, फूलों ने अपनी आँखें खोली, खुशबू की पुड़िया फ़िज़ा मे उडेली, पेड़ों की हरी भरी टहनियों पे, औस की बूंदों के सज गये हैं गहने, अंगड़ाई लेकर सबने बिस्तर छोरा, हर कोई अपने काम की और दोरा, ये सब तो है कुदरत का फेरा, उठो देखो हो ग्या सवेरा..
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